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Useful Tips

Kuchh vaastu tips🔴🔴🔴🔴
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।
💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से धन की हानी होती हैं। लक्ष्मी घर से निकल जाती है1 घर मे अशांति होती है1
💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |

"पानी पीने का सही वक़्त".
(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...
(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...
(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..
(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!

अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!

तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग

चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!

प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!

भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!

प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!

घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!

सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!!

देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल!!

दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!

सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!

भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!

अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!

पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!

अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!

फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!

रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!

Compatible Blood Types

O- ले सकता है O-
O+ ले सकता है O+, O-
A- ले सकता है A-, O-
A+ले सकता है A+, A-,O+,O-
B- ले सकता है B-, O-
B+ ले सकता है B+,B-,O+,O-
AB-ले सकता है AB-,B-,A-,O-
AB+ ले सकता है AB+, AB-, B+, B-, A+, A-, O+, O-
ये महत्वपूर्ण है जो किसी की जिंदगी बचा सकता है

नव दुर्गा --
-शैल पुत्री
-ब्रह्मचारिणी ,
-चंद्रघंटा ,
-कुष्मांडा ,
-स्कंदमाता ,
-कात्यायिनी ,
-कालरात्रि ,
-महागौरी एवं
-सिद्धिदात्री !

दस दिशाएं -
-पूर्व ,
-पश्चिम ,
-उत्तर ,
-दक्षिण ,
-ईशान ,
-नैऋत्य ,
-वायव्य ,
-अग्नि
-आकाश एवं
-पाताल !-

मुख्य ११ अवतार -
-मत्स्य ,
-कच्छप ,
-वराह ,
-नरसिंह ,
-वामन ,
-परशुराम ,
-श्री राम ,
-कृष्ण ,
-बलराम ,
-बुद्ध ,
-एवं कल्कि !

बारह मास -
-चैत्र ,
-वैशाख ,
-ज्येष्ठ ,
-अषाढ ,
-श्रावण ,
-भाद्रपद ,
-अश्विन ,
-कार्तिक ,
-मार्गशीर्ष ,
-पौष ,
-माघ ,
-फागुन !

बारह राशी -
-मेष ,
-वृषभ ,
-मिथुन ,
-कर्क ,
-सिंह ,
-कन्या ,
-तुला ,
-वृश्चिक ,
-धनु ,
-मकर ,
-कुंभ ,
-कन्या !-

बारह ज्योतिर्लिंग -
-सोमनाथ ,
-मल्लिकार्जुन ,
-महाकाल ,
-ओमकारेश्वर ,
-बैजनाथ ,
-रामेश्वरम ,
-विश्वनाथ ,
-त्र्यंबकेश्वर ,
-केदारनाथ ,
-घुष्नेश्वर ,
-भीमाशंकर ,
-नागेश्वर !

पंद्रह तिथियाँ -
-प्रतिपदा ,
-द्वितीय ,
-तृतीय ,
-चतुर्थी ,
-पंचमी ,
-षष्ठी ,
-सप्तमी ,
-अष्टमी ,
-नवमी ,
-दशमी ,
-एकादशी ,
-द्वादशी ,
-त्रयोदशी ,
-चतुर्दशी ,
-पूर्णिमा ,
-अमावास्या !

स्मृतियां -
-मनु ,
-विष्णु ,
-अत्री ,
-हारीत ,
-याज्ञवल्क्य ,
-उशना ,
-अंगीरा ,
-यम ,
-आपस्तम्ब ,
-सर्वत ,
-कात्यायन ,
-ब्रहस्पति ,
-पराशर ,
-व्यास ,
-शांख्य ,
-लिखित ,
-दक्ष ,
-शातातप ,
-वशिष्ठ !

पञ्च देव -
-गणेश ,
-विष्णु ,
-शिव ,
-देवी ,
-सूर्य !

पंच तत्त्व -
-पृथ्वी ,
-जल ,
-अग्नि ,
-वायु ,
-आकाश !

छह दर्शन -
-वैशेषिक ,
-न्याय ,
-सांख्य ,
-योग ,
-पूर्व मिसांसा ,
-दक्षिण मिसांसा !

सप्त ऋषि -
-विश्वामित्र ,
-जमदाग्नि ,
-भरद्वाज ,
-गौतम ,
-अत्री ,
-वशिष्ठ और कश्यप!

सप्त पुरी -
-अयोध्या पुरी ,
-मथुरा पुरी ,
-माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
-काशी ,
-कांची
-( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
-अवंतिका और
-द्वारिका पुरी !

आठ योग -
-यम ,
-नियम ,
-आसन ,
-प्राणायाम ,
-प्रत्याहार ,
-धारणा ,
-ध्यान एवं
-समािध !

आठ लक्ष्मी -
-आग्घ ,
-विद्या ,
-सौभाग्य ,
-अमृत ,
-काम ,
-सत्य ,
-भोग ,एवं
-योग लक्ष्मी !

दो पक्ष-
-कृष्ण पक्ष
-शुक्ल पक्ष !

तीन ऋण -
-देव ऋण ,
-पितृ ऋण ,
-ऋषि ऋण !

चार युग -
-सतयुग ,
-त्रेतायुग ,
-द्वापरयुग ,
-कलियुग !

चार धाम -
-द्वारिका ,
-बद्रीनाथ ,
-जगन्नाथ पुरी ,
-रामेश्वरम धाम !

चारपीठ -
-शारदा पीठ ( द्वारिका )
-ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
-गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
-शृंगेरीपीठ !

चार वेद-
-ऋग्वेद ,
-अथर्वेद ,
-यजुर्वेद ,
-सामवेद !

चार आश्रम -
-ब्रह्मचर्य ,
-गृहस्थ ,
-वानप्रस्थ ,
-संन्यास !

चार अंतःकरण -
-मन ,
-बुद्धि ,
-चित्त ,
-अहंकार !

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